गौशाला बाड़ी माता

गौशाला बाड़ी माता

बाड़ी माता मन्दिर पर 20 जनवरी 2001 में किसी अज्ञात क्रूर समाज कंटक द्वारा एक बच्छडी का कुल्हाड़ी से पैर काट दिया पैर लहुलुहान हो गया उस स्थिति में बच्छडी हरा चारा खाने के लिए गुरुदेव श्री के द्वारा गायों को हरा चारा डलवाने का कार्य निरन्तर था, उसी में अचानक गुरुदेव की बड़ी बेटी हे‌मा जी टांक की नजर पड़ी और गुरुदेव से कहा कि मेरे वेतन से यह पाँच सौ रुपये लो किसी किसान को सेवा करने के लिए इस बच्छडी को दे दो ताकि इसकी सेवा हो सके।

गुरुदेव ने कहा कि यह पैसा मुझे दो ताकि लावारिस गौवंशों के चार- पानी व उपचार में स्वयं करूंगा,उस दिन से निरन्तर गौमाता की संख्या बढ़ने लगीं। 2001 में 880 गौवंशों की सेवा हो रही थी, ग्राम पंचायत बाड़ी के चरागाह में अस्थाई बाड़ा बन्दी करके गायों को रखा जाना लगा एवं चारा पानी की समुचित व्यवस्था माँ भगवती की कृपा से होने लगी इस तरह बाड़ी माता गौशाला का शुभारंभ हुआ।